श्री हनुमान बाहुक गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित एक अमूल्य रचना है, जो भक्तिभाव, श्रद्धा और संकट मोचक श्री हनुमान जी की अनन्य कृपा को समर्पित है। यह ग्रंथ न केवल आध्यात्मिक साधकों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, बल्कि यह हर उस व्यक्ति के लिए एक अमोघ उपाय है, जो जीवन के कष्टों और बाधाओं से मुक्ति चाहता है।
गोस्वामी तुलसीदास जी ने इस अद्वितीय रचना में श्री हनुमान जी के प्रति अपनी गहन भक्ति और उनके अद्वितीय चरित्र को प्रस्तुत किया है। "श्री हनुमान बाहुक" की प्रत्येक पंक्ति में श्री हनुमान जी के प्रति श्रद्धा, उनकी शक्ति, और उनके दैवीय गुणों का सजीव चित्रण किया गया है।
यह ग्रंथ मुख्यतः उन लोगों के लिए है, जो शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक कष्टों से छुटकारा पाना चाहते हैं। श्री हनुमान बाहुक का पाठ करने से हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है, रोग और बाधाएँ दूर होती हैं, और जीवन में सुख-शांति का अनुभव होता है।
इस रचना में गोस्वामी तुलसीदास जी ने जिस काव्य सौंदर्य और सरल भाषा का उपयोग किया है, वह इसे हर आयु और वर्ग के व्यक्तियों के लिए सुलभ और प्रभावी बनाता है। यह रचना केवल पाठ के लिए नहीं, बल्कि हमारे जीवन में आत्मविश्वास, धैर्य और ईश्वर में अनन्य विश्वास को जागृत करने का एक साधन भी है।
श्री हनुमान बाहुक का नियमित और श्रद्धापूर्वक पाठ, न केवल हमारे दैनिक जीवन की कठिनाइयों को हल करता है, बल्कि हमें आध्यात्मिक उन्नति की ओर भी प्रेरित करता है।
भक्तों के लिए यह ग्रंथ एक ऐसा दीप है, जो अज्ञान और अंधकार के जीवन में प्रकाश फैलाता है। आइए, श्री हनुमान जी की अनुकंपा प्राप्त करने के लिए हम उनके चरणों में अपना समर्पण अर्पित करें और "श्री हनुमान बाहुक" के माध्यम से अपने जीवन को सार्थक बनाएं।
जय श्री हनुमान!